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सभ्यता :- दो कदम और...

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यदि पाश्चात्य इतिहासकारो और पुरातत्वविदों की बात की जाए तो मनुष्य का विकास वानरों से हुआ है। मनुष्य अपनी आदिम अवस्था मे वानर था, और निरंकुशता पूर्वक जंगलो में घूमता था । और घूमता भी क्यों न, आखिर नगरीय सभ्यता का विकास हुआ तो मनुष्यो से ही है । और जब मनुष्य  स्वयं ही वानर था तो जंगलो में ही रहेगा न। यदि मैं अपनी व्यक्तिगत बात करूँ तो मुझको उपर्युक्त बात से कोई भी सरोकार नहीं है। क्योकि मैं पूर्ण रूपेण आस्तिक व्यक्ति हूँ और वेदों में, श्री भगवत गीता में अगाध विश्वास रखता हूँ । खैर मैं यहां पर इस बात में कतई उलझना नहीं चाहता कि कौन सत्य है और कौन असत्य । यह लेख लिखने का मेरा उद्देश्य कुछ और ही है । किन्तु यह तो विल्कुल सत्य है कि मनुष्य की आदिम अवस्था जो भी रही हो, वो उस समय निरा असभ्य और अशिक्षित था। जैसे जैसे समय बीतता गया , अनुभवों के आधार पर मनुष्य में शिक्षा और सभ्यता का स्तर बढ़ता गया ।        इस दृष्टि से   वर्तमान में हम जो समाज देखते हैं और अपने चारो ओर जिस वातावरण  का अनुभव करते हैं वह पूर्णता सभ्य होना चाहिए। क्योंकि कई हजार बर्षो से निरन्त...